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देहरादून साहित्य महोत्सव में शामिल हुए पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़, कहा 12वीं के बाद करियर का निर्णय लेना जल्दी

दून इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित साहित्य महोत्सव में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने छात्रों से बातचीत की। उन्होंने करियर चुनाव में जल्दबाजी न करने और अनुभव से सीखने की सलाह दी। छात्रों के अधिकारों और अनुशासन पर सवालों के जवाब दिए। चंद्रचूड़ ने नेतृत्व क्षमता और सतत शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। वहीं, रस्किन बांड ने युवाओं को पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित किया।

दून इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित 7वें देहरादून साहित्य महोत्सव में छात्रों के लिए एक अत्यंत प्रेरक और ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने हेड गर्ल पलक तोमर और हेड ब्वाय अवनीश सिंह चौहान के साथ बातचीत की। छात्रों के सवाल केवल पाठ्यपुस्तक या कानूनी जर्नल से नहीं, बल्कि अपने अनुभव, सोच और जिज्ञासा से उठाए गए।

शिक्षा और करियर विकल्प

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने छात्रों को सलाह दी कि 12वीं के बाद करियर का निर्णय लेना बहुत जल्दी है। इस समय अपने विकल्प खुला रखें और जितना हो सके पढ़ाई और अनुभव से सीखें। उन्होंने कहा कि जीवन में विकल्प बदलना सामान्य है। आप पहले वकील बन सकते हैं और बाद में लेखक, डिजाइनर या समाजसेवी बन सकते हैं। यह पूरी तरह आपकी जिज्ञासा, सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास पर निर्भर करता है।

सत्र के दौरान उन्होंने अपने अनुभव साझा किए कि कैसे उन्होंने बचपन और छात्र जीवन में विभिन्न गतिविधियों के जरिए ज्ञान और समझ का दायरा बढ़ाया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि सिर्फ परीक्षा पास करने की शिक्षा पर्याप्त नहीं है, असली शिक्षा अपने प्रयास और जिज्ञासा से आती है।

मूलभूत अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता

छात्रों ने स्कूल में अधिकार और अनुशासन पर सवाल पूछा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने बताया कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकार, जैसे स्वतंत्रता, विचार, विश्वास और अभिव्यक्ति, सभी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने समझाया कि स्वतंत्रता का प्रयोग हमेशा दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए होना चाहिए।

यदि कोई छात्र पूरी कक्षा में बोलता है या दूसरों को अवसर नहीं देता, तो यह अनुचित है। स्कूल में अनुशासन और अधिकारों का संतुलन जरूरी है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे छात्र थे, तो बालों को अपनी पसंद अनुसार बढ़ाने की इच्छा थी, लेकिन स्कूल ने अनुशासन बनाए रखने के लिए नियम लागू किए। स्वतंत्रता और अनुशासन दोनों का संतुलन जीवन में सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नेतृत्व और सफलता

छात्रों के सवालों के जवाब में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व उदाहरण प्रस्तुत करने से शुरू होता है। एक अच्छा नेता दूसरों में नेतृत्व क्षमता विकसित करता है। उन्होंने बताया कि स्कूल में छात्र परिषद, हेड गर्ल या हेड ब्वाय का कार्यकाल छोटा हो सकता है, लेकिन उनका मार्गदर्शन भविष्य के नेताओं को प्रेरित कर सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सफलता केवल शीर्ष पर रहने से नहीं आती, बल्कि अनुभव, सीख और दूसरों को आगे बढ़ाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने विविधता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि अच्छा नेतृत्व विभिन्न संस्कृतियों और विचारों का सम्मान करता है और दूसरों की सफलता को अपनाने की क्षमता रखता है।

सतत शिक्षा और जीवन में सीख

न्यायमूर्ति ने शिक्षा और सीखने की सतत प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कक्षा तक सीमित शिक्षा असली शिक्षा नहीं है। पढ़ाई, अनुभव और जिज्ञासा से सीखना जीवनभर जारी रहता है। बोर्ड परीक्षाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन में अच्छा इंसान बनना और समाज के लिए योगदान देना उससे भी अधिक जरूरी है।

उन्होंने अपने दैनिक जीवन का उदाहरण दिया कि चाहे छात्र जीवन में हो या मुख्य न्यायाधीश के रूप में, उन्होंने हमेशा नए ज्ञान को अपनाने और सीखने का प्रयास किया। संगीत, साहित्य और कला के प्रति उनका लगाव भी छात्रों के लिए प्रेरक रहा।

रस्किन बांड नेविचार साझा किए

लेखक रस्किन बांड ने लिटरेचर फेस्टिवल में वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं और साहित्य प्रेमियों को प्रेरित करते हुए कहा कि लेखक बनने के लिए सबसे पहले एक पाठक होना जरूरी है। जो लोग सच में किताबों से प्रेम करते हैं, वही अंततः लेखक बनते हैं। मैंने हमेशा खुद को पहले एक पाठक और उसके बाद लेखक माना। बांड ने पाठकों को संदेश दिया कि उनके जीवन में किताबों को अपना मित्र बनाएं, पढ़ें, लिखें और शब्दों में आनंद खोजें।

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