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उत्तराखंड में प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्टों की होगी तैनाती, मरीजों को जल्द मिलेगा इलाज

देहरादून में स्वास्थ्य विभाग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के लिए फार्मासिस्टों की तैनाती करेगा। पुराने ढांचे को पुनर्जीवित किया जाएगा जिससे कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है खासकर जहां चिकित्सकों की कमी है। विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है जिसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।स्वास्थ्य विभाग अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व स्वास्थ्य उप केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस कड़ी में अब फार्मासिस्टों को प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी तैनात करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फार्मासिस्ट संवर्ग के पुराने ढांचे को पुनर्जीवित किया जाएगा।

इससे विभाग पर कोई वित्तीय भार भी नहीं आ रहा है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ रहे हैं। इस क्रम में सरकार चिकित्सकों की तैनाती कर रही है और अब वह सुदरवर्ती पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।इसके लिए सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व उप केंद्रों में फार्मासिस्टों की तैनाती करना चाहती है।  फार्मासिस्ट स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में जहां चिकित्सकों की खासी कमी है।

यहां फार्मासिस्ट कई बार चिकित्सकों की अनुपस्थिति में मरीजों को आवश्यक दवाएं देने का कार्य करते हैं। प्रदेश में पहले फार्मासिस्ट के 1354 पद स्वीकृत थे। इनमें उप केंद्रों में शामिल फार्मासिस्ट के पद भी शामिल थे। यह सभी पद भरे हुए थे।

प्रदेश सरकार द्वारा इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टेंडर्ड के मानकों को अपनाने के कारण इनकी संख्या 963 रह गई। ऐसे में शासन ने स्वीकृत पदों से अधिसंख्य 391 फार्मासिस्ट को एनएचएम में तैनाती दे दी। इन्हें वेतन व अन्य सुविधाएं पूर्व की भांति ही प्रदान की गई।

अब प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। ऐसे में फार्मासिस्ट का पुराना ढांचा पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। सचिव स्वास्थ्य डा आर राजेश कुमार का कहना है कि इस दिशा में लगातार प्रयास चल रहे हैं।

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