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महंगाई में ‘महंगे’ हो गए दशानन, कुंभकर्ण-मेघनाद के वध में भी लग रहा ज्यादा खर्च

देहरादून में दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस बार रावण मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों पर महंगाई की मार पड़ी है जिससे इनके दाम 25% तक बढ़ गए हैं। बांस रस्सी और कागज महंगा होने के साथ-साथ मजदूरी में वृद्धि भी लागत बढ़ने का कारण है। फिर भी आयोजकों ने पुतलों की ऊंचाई में कमी नहीं की है और तैयारी जोरों पर है।असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा दो अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसे लेकर शहर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतलों पर महंगाई की मार पड़ गई है। बांस, रस्सी और कागज महंगा होने से पुतलों के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

मजदूरी में बढ़ोतरी से भी पुतलों की लागत बढ़ी है। दून में दशहरा मेले के प्रमुख आयोजक संस्थाओं ने लागत बढ़ने के बावजूद पुतलों की ऊंचाई में कमी नहीं की है।

दशहरे के दिन दून में भी कई जगह बुराई के प्रतीक के रूप में रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यहां परेड ग्राउंड, कांवली, हिंदू नेशनल स्कूल परिसर, राजपुर, पटेलनगर, प्रेमनगर में विभिन्न समितियों की ओर से रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों और लंका का दहन किया जाता है।इस बार के पुतला दहन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्री सेवा कुंज समिति दशहरा कमेटी पटेलनगर के आयोजक पंकज चांदना बताते हैं कि 50 फीट का पुतला पहले एक एक लाख रुपये तक बन जाता था, इस बार सवा लाख अधिक लागत आ रही है।

बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी के परेड ग्राउंड में पुतला बनाने वाले आगरा से पहुंचे कारीगर अयान ने बताया कि बढ़ती महंगाई का असर पुतलों की लागत पर भी पड़ा है। पुतलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बांस के साथ ही रस्सी भी महंगी है। मजदूरी भी पहले से अधिक है।

ऐसे में पुतला के दाम बढ़ाना स्वाभाविक है। 45 फीट का जो पुतला पहले 60 हजार में तैयार हो जाता था, अब उसकी कीमत 75 हजार से अधिक पहुंच गई है। इस कीमत में आतिशबाजी शामिल नहीं है।

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