जेएफएफ स्वागत को तैयार, सिनेमा जगत में आपका इंतजार

जागरण फिल्म फेस्टिवल सिनेमा प्रेमियों के स्वागत के लिए तैयार है। आयोजकों ने फिल्मों के चयन और स्क्रीनिंग की व्यवस्था सहित सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सिनेमा जगत और दर्शक दोनों ही इस फेस्टिवल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों को प्रदर्शित करने और दर्शकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।स्थानीय और देश-विदेश की बेहतरीन फिल्मों को दून के सिने प्रेमी दर्शकों तक पहुंचाने और फिल्म जगत से जुड़ी जिज्ञासा पर विराम लगाने के लिए तीन दिवसीय ””जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) कल शुक्रवार से शुरू होगा। राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी सिनेमाज में तीन दिवसीय महोत्सव दो नवंबर तक चलेगा।
यहां 20 फिल्में दिखाई जाएंगी साथ ही बातचीत के विशेष सत्र में अभिनेता और फिल्ममेकर रजत कपूर, निर्देशक राधेश्याम पिपलवा, प्राेड्यूसर शरद मित्तल और अभिनेता एवं स्क्रीनराइटर सौरभ शुक्ला खास होंगे। इसके लिए साहित्य, कला, फिल्म के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों और आमजन में भी उत्साह है।दो नवंबर तक चलने वाले इस खास महोत्सव का हिस्सा बने। समाज को सशक्त संदेश देने वाली फिल्मों का आनंद उठाएं और सिनेमा को लेकर अपना और अधिक ज्ञान बढ़ाएं। तो आइए आपका परिचय कराते हैं फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली कुछ फिल्मों से।
हिंदी फीचर फिल्म: पुतुल
निर्देशक: राधेश्याम पिपलवा, अवधि 98 मिनट
पुतुल एक सात वर्ष की बच्ची है। जो अपने माता-पिता के तलाक के भावनात्मक संकट से जूझ रही है। दुखी, क्रोधित और भ्रमित, वह अप्रत्याशित जगहों पर सांत्वना ढूंढ़ती है। हर जगह व माता-पिता को अपने टूटे हुए रिश्तों का सामना करने के लिए मजबूर करती है। उसकी अपनी स्वतंत्रता और समझ की गहरी ज़रूरत के बारे में भी यह दिखाती है। यह मार्मिक और रहस्यपूर्ण बचपन के आघात, माता-पिता की ज़िम्मेदारी और पारिवारिक बंधनों की स्थायी शक्ति के विषयों की पड़ताल करता है।
हिंदी शार्ट फिल्म: लालसा
निर्देशक वाल्मिक पुरी, अवधि 26 मिनट
इस फिल्म में दिखाया जाता है कि रोहन को स्कूल में बुरी तरह परेशान किया जाता है। वह अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करता है। उसकी किशोरावस्था की उथ-पुथल उसे भयानक परिणामों में भंवर में धकेल देती है।
फिलिपिंसेस फिल्म: अवर उन एंड ओनली बेबी
निर्देशक मार्क जोसेफ, अवधि 10 मिनट
इस फिल्म में थेल्मा जो फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित है। जिसमें उसके बच्चे को भी दिखाया है। जिसे प्यार तो करती है लेकिन बाद में इसे बेचना पड़ता है। इसमें थेल्मा की संघर्ष को दिखाया गया है।
मराठी फिल्म: मुकाम पोस्ट देवांचा घर
निर्देशक संकेत माने, अवधि 111 मिनट
छह वर्ष की जिया के पिता युद्ध में लापता हैं। वह मां और दादी के साथ गांव में रहती है। उसे भरोसा है कि एक दिन उसके पिता लौटकर जरूर वापस आएंगे। इसी उम्मीद के साथ वह एक दिन ईश्वर को पत्र भी लिखती है। उसे आशा है कि यह पत्र उसका भाग्य बदल सकता है।




