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टपकेश्वर महादेव, गुच्चू पानी, सहस्त्रधारा हर टूरिस्ट प्लेस तबाह, मसूरी-ऋषिकेश का बुरा हाल, आपदा ने दिऐ गहरे जख्म

देहरादून में आयी आपदा ने पर्यटन स्थलों को तबाह कर दिया है। अब इन पर्यटक स्थलों को ठीक होने में कितना समय लगेगा यह तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन कारोबारियों को जरूर उबरने में समय लगेगा।उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जो पर्यटन स्थलों के लिए मशहूर है, आपदा का शिकार हो गया है। देहरादून के कई पर्यटन क्षेत्रों में मंगलवार को आयी आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया है। देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर, गुच्चू पानी, सहस्त्रधारा, मालदेवता के साथ ही मसूरी में भट्टा फाल सहित कई स्थानों पर भारी बारिश ने कहर बरपाया है। ऐसा ही हाल तीर्थनगरी और योग नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले ऋषिकेश का हुआ है। जिन पर्यटक स्थलों में तबाही मची है उनको ठीक होने में समय लगेगा लेकिन फिलहाल आपदा के चलते पर्यटकों की कमी जरूर खलेगी। वहीं इस आपदा में 13 लोगों की जान चली गयी जबकि छह लोग लापता हैं।

वैसे तो इस पहाड़ी प्रदेश में हर साल मानसून के सीजन में आपदाएं आती हैं। पहाड़ों में भूधंसाव, भूस्खलन की घटनाएं भी होती हैं लेकिन देहरादून में तबाही का ऐसा मंजर पहली बार दिखायी दिया। देहरादून उत्तराखंड की पूरी सरकारी मशीनरी का केंद्र है और आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के साथ ही अन्य सहयोग भी यहीं से दिया जाता है लेकिन इस बार आपदा ने देहरादून के र्प्यटक स्थलों को ही जख्म दे दिया।देहरादून में वर्ष 2011 में कार्लीगाड़ में बादल फटने के साथ ही सौंग और बांदल घाटी में भी बादल फटने से तबाही मचती रही हैं। मालदेवता का सरखेत गांव तो आपदा से जख्म से उबर भी नहीं पाया और अब एक बार फिर मालदेवता, सहस्त्रधारा में तबाही मच गयी। इस बार कुछ ऐसा हुआ, जिसकी देहरादून के लोगों को उम्मीद भी नहीं थी। अब तो मानसून की विदाई का समय आ रहा था लेकिन, विदा लेने से पहले मानसून ने ऐसे तेवर दिखाये कि देहरादून का रूप ही बदल गया।टपकेश्वर महादेव मंदिर में आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया है।मंदिर के पास बहने वाली तमसा नदी इस कदर रौद्र रूप में आयी गयी कि मंदिर से वैष्णों देवी गुपफा की ओर जाने वाला पुल टूट गया। मंदिर के भीतर इतना पानी आ गया कि पौराणिक शिवलिंग भी जलमग्न हो गया। मंदिर के बाहर लगी भगवान शिव की पीतल से बनी मूर्ति भी बह गयी। इस मंदिर में सावन के महीने में ही नहीं बल्कि हमेशा ही भक्तों और पर्यटकों का तांता लगा रहता है।

व्हीं सहस्त्रधारा में सर्दियों को छोड़ कर हमेशा ही पर्यटकों का सैलाब उमड़ा रहता है। सहस्त्रधारा के कार्लीगाड में अतिवृष्टि के कारण भारी नुकसान पहुंचा है। यहां फंसे सभी लोगों को एसडीआरएफ ने अस्थायी पुल बना कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। मालदेवता में भी बारिश से काफी नुकसान हुआ है। कई दुकानें नदी के तेज बहाव में बह गयी। मालदेवता क्षेत्र के दुर्गम गांव धंतो का सेरा में पहाड़ से आये मलबे में एक झोपड़ी ढह गयी। जिससे पति-पत्नी की दब कर मौत हो गयी। ये लोग यहां पर मजदूरी करते थे।

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