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पक्के मोटर मार्गों में तब्दील होंगे उत्तराखंड के 5700 किलोमीटर कच्चे मार्ग, मंदिर माला परियोजना पर काम जारी

लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तराखंड में सड़कों का जाल लगातार बढ़ रहा है। राज्य गठन के समय सड़कों की लंबाई 15,470 किमी थी, जो अब 43,765 किमी हो गई है। सरकार 5700 किमी कच्चे मार्गों को पक्का करने और कई बाईपास बनाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, कुमाऊं के 16 प्राचीन मंदिरों को जोड़ने वाली सड़कों का भी विकास किया जाएगा।लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तराखंड की रजत जयंती पर विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2000 राज्य गठन के समय प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई 15,470 किलोमीटर थी, जो 25 वर्षों में बढ़कर 43,765 किमी हो चुकी है।

अगले 25 वर्षों में हमारा लक्ष्य अमृतसर-कोलकत्ता औद्योगिक गलियारे के तहत 10.60 किलोमीटर नगला-किच्छा मार्ग को दो लेन से चार लेन में परिवर्तित करने करने सहित कई बड़ी परियोजनाओं पर काम करने का है, ताकि 2047 तक उत्तराखंड विकसित राज्य की श्रेणी में आ सके।उन्होंने कहा कि राज्य में 5700 किलोमीटर कच्चे मार्गों को पक्के मोटर मार्गों में परिवर्तित किया जाएगा और राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत 1469 किलोमीटर सिंगल लेन मार्गों को डबल लेन में परिवर्तित किया जाएगा। दुर्गम स्थानों में मार्ग की दूरी कम करने व बाईपास के लिए टनल्स का निर्माण, रोपवे का निर्माण और भूमिगत गलियारे बनाए जाएंगे।

उन्होंने कहा, अगले 25 वर्षों में हल्द्वानी बाईपास, खटीमा बाईपास, काठगोदाम, आशारोड़ी-आईएसबीटी-मोहकमपुर, देहरादून देहरादून, लोहाघाट, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, ऋषिकेश, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर, अगस्तमुनि, पौड़ी, श्रीनगर, आदि बद्री, रामनगर, कोटद्वार, हरिद्वार, लाल कुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम, पंतनगर में बाइपास का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।

विजन-2050 के लिए एक ठोस कार्य योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत मानसखंड मंदिर माला परियोजना के तहत चारधाम की तर्ज पर कुमाऊं के 16 प्राचीन मंदिरों को जोड़ने वाली सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। राज्य के 460 पुराने क्लास-बी लोडिंग पुलों को आधुनिक और भारी वाहनों के लिए क्लास-ए में अपग्रेड किया जाएगा।

विस्तारीकरण के तहत 1469 किलोमीटर सिंगल लेन राष्ट्रीय राजमार्ग को दो लेन में बदला जाएगा। खैरना-रानीखेत-रामनगर जैसे महत्वपूर्ण राज्य राजमार्गों का चौड़ीकरण किया जाएगा।

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