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उत्तराखंड में नदियों को बचाने के लिए सात परियोजनाओं की डीपीआर तैयार, खर्च होंगे 225 करोड़ रुपये

उत्तराखंड की नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने सात कस्बों में जल शोधन प्लांट लगाने का फैसला किया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 225 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन प्लांट से प्रतिदिन 58 लाख लीटर दूषित जल को नदियों में जाने से रोका जा सकेगा। इससे नदियों की पवित्रता और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में मदद मिलेगी।हिमालय की वादियों से निकलती नदियां सदियों से जीवनदायिनी रही हैं। अब इन नदियों के उद्गम स्थलों को ही मानव बस्तियों का प्रयुक्त जल दूषित कर रहा है। भगीरथी, अलकनंदा और बालगंगा जैसी नदियों में रोज़ाना लाखों लीटर गंदा पानी घुल रहा है। इसे रोकने के लिए अब पहाड़ के सात कस्बों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रयुक्त जल शोधन प्लांट लगाए जाएंगे।

शोधित जल ही नदियों में प्रवाहित होगा। परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो गई है। परियोजनाओं पर करीब 225 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे प्रतिदिन 58 लाख लीटर प्रयुक्त जल को नदियों में प्रवाहित होने से रोका जा सकेगा। शहरी विकास मंत्रालय स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत प्रयुक्त जल प्रबंधन पर काम कर रहा है।उत्तराखंड में प्रतिदिन 85.6 मिलियन लीटर पानी उपयोग होता है। प्रयुक्त जल को पुन: प्रयोग लायक बनाने की योजनाओं पर काफी धीमी गति से काम हो रहा है। शहरी निकायों के लिए अब तक केवल सात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की डीपीआर ही तैयार की जा सकी हैं। यह संख्या पूरे राज्य के शहरी क्षेत्रों की जरूरत के मुकाबले काफी कम है।

इससे ज्यादातर शहरों में प्रयुक्त जल प्रबंधन अब तक अधूरा है। परियोजनाओं पर कुल 225 करोड़ रुपये खर्च होंगे, इसमें 203 करोड़ रुपये केंद्र सरकार व 22 करोड़ रुपये राज्य सरकार देगी। शहरी विकास विभाग ने डीपीआर नेशनल इंस्टीटयूट आफ अर्बन को भेज दी है, ताकि उनके सुझावों काे भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जा सके।

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