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कैसी है पाठशाला? भालू का डर.यहां छात्र-छात्राओं के लिए विद्यालय जाना ही मुसीबत

जूहा स्कूल स्यारी बंगाली में 91 और प्राथमिक विद्यालय स्यांरी में 15 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय तक आने में छात्रों को करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।चमोली जनपद के जूनियर हाईस्कूल स्यारी बंगाली में विद्यालय भवन बेहतर स्थिति में है। शिक्षक और संसाधन भी पर्याप्त हैं। फिर भी छात्र-छात्राएं डरते हुए विद्यालय पहुंचते हैं। इसका कारण है विद्यालय के आसपास भालुओं का घूमना। कब भालू छात्र-छात्राओं पर झपट्टा मार दें, कहा नहीं जा सकता है। विद्यालय प्रबंधन ने वन विभाग के अधिकारियों के सामने भी यह समस्या रखी, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। भालू कई बार दिन में भी विद्यालय के समीप घूमते दिख रहा है। उसके साथ बच्चे भी हैं।जूहा स्कूल स्यारी बंगाली में 91 और प्राथमिक विद्यालय स्यांरी में 15 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय तक आने में छात्रों को करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। विद्यालय का रास्ता जंगल और खेतों के बीच से होकर गुजरता है। जिससे भालू, जंगली सुअर, गुलदार, घुरड़ जैसे वन्यजीव विद्यालय परिसर तक पहुंच जाते हैं। कई बार अभिभावक अपने बच्चों को छोड़ने विद्यालय तक जाते हैं।इन दिनों विद्यालय से करीब 300 मीटर की दूरी पर धारकोट और रिख्वाड़ी तोक में भालू अपने बच्चों के साथ रह रहा है। बदरीनाथ वन प्रभाग के कर्मियों ने प्रभावित क्षेत्र में जाकर भालू को भगाने के लिए पटाखे फोड़े और ग्रामीणों को जागरूक रहने के लिए उनके साथ बैठक की।विद्यालय के समीप ही कई बार भालू दिखाई दिया है। वह अपने बच्चों के साथ खेतों में पहुंच रहा है। जिससे छात्र-छात्राओं में दहशत है। विद्यालय के बड़े छात्र कनस्तर और छोटे बच्चे प्लास्टिक की सीटी बजाते हुए विद्यालय पहुंच रहे हैं। उनके साथ भोजन माता और शिक्षक टीका प्रसाद सेमवाल की ड्यूटी लगाई गई है।भालू को जंगल की ओग भगाने के लिए खेतों में पटाखे जलाए गए। साथ ही वनकर्मियों की लंबी दूरी की गश्त बढ़ाई गई है। ग्रामीणों के साथ जागरुकता गोष्ठी भी आयोजित की गई है।





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